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नवग्रह मंत्र — मुख्य तथ्य

1. 9 ग्रह: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु
2. प्रत्येक ग्रह का अपना बीज मंत्र, वैदिक मंत्र और गायत्री मंत्र
3. दैनिक जाप: न्यूनतम 108 बार (एक माला) प्रत्येक ग्रह के लिए
4. नवग्रह स्तोत्र: सभी 9 ग्रहों की एकसाथ शांति का सर्वोत्तम उपाय
5. ग्रह अनुसार दान, रंग, व्रत और रत्न भी प्रभावी उपाय हैं
6. कुंडली विश्लेषण से कमजोर ग्रह पहचानें, तभी सटीक उपाय करें

नवग्रह क्या हैं?

वैदिक ज्योतिष में नवग्रह (नव = नौ, ग्रह = ग्रह/पिंड) 9 खगोलीय पिंडों को कहते हैं जो मनुष्य के जीवन को गहराई से प्रभावित करते हैं। ये हैं — सूर्य (Sun), चंद्रमा (Moon), मंगल (Mars), बुध (Mercury), बृहस्पति (Jupiter), शुक्र (Venus), शनि (Saturn), राहु (North Node) और केतु (South Node)।

जन्म कुंडली में प्रत्येक ग्रह की स्थिति, बल और दशा — व्यक्ति के स्वास्थ्य, करियर, विवाह, धन और आत्मिक विकास को प्रभावित करती है। जब कोई ग्रह कमजोर, नीच, अस्त या पाप प्रभाव में हो, तो उस ग्रह के मंत्र जाप, दान और पूजा से ग्रह दोष शांत होता है।

महत्वपूर्ण सलाह: मंत्र जाप से पहले अपनी कुंडली का विश्लेषण कराएं और जानें कि कौन सा ग्रह कमजोर है। बिना विश्लेषण के सभी ग्रहों के मंत्र जपना आवश्यक नहीं। GrahaGuru पर मुफ्त कुंडली बनाकर अपने कमजोर ग्रह पहचानें।

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1. सूर्य (Sun) — आत्मा और पिता का कारक

संस्कृत: सूर्यदेव | अधिदेवता: अग्नि | स्वामित्व: सिंह राशि

बीज मंत्र:

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

वैदिक मंत्र:

ॐ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च। हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्॥

दिन
रविवार
रंग
लाल / केसरी
रत्न
माणिक्य
धातु
तांबा / सोना
जाप संख्या
7,000
दान (रविवार): गेहूं, गुड़, तांबे की वस्तुएं, लाल वस्त्र, केसर। ब्राह्मण या सूर्य मंदिर में दें।

सूर्य आत्मा, पिता, सरकारी नौकरी, नेतृत्व, अहंकार और हृदय का कारक है। कमजोर सूर्य से आत्मविश्वास की कमी, पिता से दूरी, नेत्र रोग और सरकारी कार्यों में बाधा आती है। उपाय: रविवार को सूर्योदय पर पूर्व दिशा में तांबे के पात्र से सूर्य को जल दें (अर्घ्य)। जल में लाल फूल और तिल डालें। आदित्य हृदयम् स्तोत्र का पाठ भी अत्यंत प्रभावी है।

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2. चंद्रमा (Moon) — मन और माता का कारक

संस्कृत: चंद्रदेव / सोम | अधिदेवता: वरुण | स्वामित्व: कर्क राशि

बीज मंत्र:

ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः

वैदिक मंत्र:

ॐ दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसंभवम्। नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥

दिन
सोमवार
रंग
सफेद / चांदी
रत्न
मोती
धातु
चांदी
जाप संख्या
11,000
दान (सोमवार): चावल, दूध, सफेद मिठाई, चांदी, सफेद वस्त्र। शिव मंदिर में दें।

चंद्रमा मन, माता, भावनाओं, स्मृति, जल और स्त्री शक्ति का कारक है। कमजोर चंद्रमा से मानसिक अशांति, अनिद्रा, मूड स्विंग, अवसाद और माता से दूरी होती है। उपाय: सोमवार को शिव मंदिर जाएं, शिवलिंग पर दूध और बेलपत्र अर्पित करें। पूर्णिमा का व्रत करें। शाम को चंद्रमा को दूध और जल का अर्घ्य दें।

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3. मंगल (Mars) — साहस और भूमि का कारक

संस्कृत: मंगलदेव / भौम | अधिदेवता: भूमि देवी | स्वामित्व: मेष, वृश्चिक

बीज मंत्र:

ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः

वैदिक मंत्र:

ॐ धरणीगर्भसंभूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्। कुमारं शक्तिहस्तं च मंगलं प्रणमाम्यहम्॥

दिन
मंगलवार
रंग
लाल
रत्न
मूंगा
धातु
तांबा / सोना
जाप संख्या
10,000
दान (मंगलवार): मसूर दाल, लाल वस्त्र, गुड़, तांबे की वस्तुएं। हनुमान मंदिर या भूमि देवी को अर्पित करें।

मंगल ऊर्जा, साहस, भूमि, भाई, रक्त और शल्य क्रिया का कारक है। मांगलिक दोष (Mangal Dosha) विवाह में बाधा डालता है। कमजोर मंगल से चोट-लगने की प्रवृत्ति, रक्त विकार, भाइयों से विवाद और भूमि संबंधी मुकदमे होते हैं। उपाय: मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करें, हनुमान चालीसा का 11 बार पाठ करें। मंगल दोष शांति के लिए 40 दिन का मंत्र अनुष्ठान करें।

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4. बुध (Mercury) — बुद्धि और व्यापार का कारक

संस्कृत: बुधदेव | अधिदेवता: विष्णु | स्वामित्व: मिथुन, कन्या

बीज मंत्र:

ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः

वैदिक मंत्र:

ॐ प्रियंगुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्। सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम्॥

दिन
बुधवार
रंग
हरा
रत्न
पन्ना
धातु
पीतल / कांसा
जाप संख्या
9,000
दान (बुधवार): मूंग दाल, हरी सब्जियां, हरे वस्त्र, किताबें। गणेश मंदिर या विद्यालय में दें।

बुध बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित, लेखन, संचार और जिज्ञासा का कारक है। कमजोर बुध से बोलने में हकलाहट, व्यापार में हानि, पढ़ाई में कमजोरी और तंत्रिका तंत्र की समस्याएं होती हैं। उपाय: बुधवार को गणेश जी की पूजा करें, हरे वस्त्र धारण करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। विद्यार्थियों को बुधवार का व्रत विशेष लाभदायक है।

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5. बृहस्पति (Jupiter) — ज्ञान और धर्म का कारक

संस्कृत: गुरुदेव / देवगुरु | अधिदेवता: इंद्र | स्वामित्व: धनु, मीन

बीज मंत्र:

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः

वैदिक मंत्र:

ॐ देवानां च ऋषीणां च गुरुं कांचनसन्निभम्। बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥

दिन
गुरुवार
रंग
पीला
रत्न
पुखराज
धातु
सोना
जाप संख्या
19,000
दान (गुरुवार): चने की दाल, हल्दी, पीले वस्त्र, केले, घी। विष्णु मंदिर या गुरु को दें।

बृहस्पति ज्ञान, धर्म, संतान, गुरु, विवाह (स्त्री कुंडली में पति) और भाग्य का कारक है। यह सबसे शुभ ग्रह माना जाता है। कमजोर बृहस्पति से धर्म से विमुखता, संतान में कठिनाई, यकृत रोग और विवाह में देरी होती है। उपाय: गुरुवार को पीले वस्त्र पहनें, विष्णु सहस्रनाम पाठ करें, केले के वृक्ष की पूजा करें और पुरोहित को दक्षिणा दें।

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6. शुक्र (Venus) — प्रेम, सौंदर्य और वैभव का कारक

संस्कृत: शुक्रदेव / भार्गव | अधिदेवता: इंद्राणी | स्वामित्व: वृषभ, तुला

बीज मंत्र:

ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः

वैदिक मंत्र:

ॐ हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्। सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्॥

दिन
शुक्रवार
रंग
सफेद / गुलाबी
रत्न
हीरा
धातु
चांदी / प्लेटिनम
जाप संख्या
16,000
दान (शुक्रवार): चावल, दही, सफेद वस्त्र, इत्र, मिठाई, कपूर। लक्ष्मी मंदिर में दें।

शुक्र प्रेम, विवाह (पुरुष कुंडली में पत्नी), सौंदर्य, कला, वाहन, भोग-विलास और धन का कारक है। कमजोर शुक्र से वैवाहिक समस्याएं, वाहन दुर्घटना और सुख-सुविधाओं की कमी होती है। उपाय: शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा और श्री सूक्त का पाठ करें। गाय को हरा चारा खिलाएं। सफेद वस्त्र पहनें।

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7. शनि (Saturn) — कर्म और न्याय का कारक

संस्कृत: शनैश्चर | अधिदेवता: यम | स्वामित्व: मकर, कुंभ

बीज मंत्र:

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

वैदिक मंत्र:

ॐ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

दिन
शनिवार
रंग
काला / गहरा नीला
रत्न
नीलम
धातु
लोहा
जाप संख्या
23,000
दान (शनिवार): तिल, सरसों का तेल, काले वस्त्र, लोहे की वस्तुएं, उड़द दाल। शनि मंदिर या मजदूरों को दें।

शनि कर्म, न्याय, अनुशासन, दीर्घायु, सेवक, कठोर परिश्रम और आध्यात्मिक उन्नति का कारक है। शनि की साढ़े साती और ढैय्या जीवन की परीक्षा होती है। उपाय: शनिवार शाम को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। कौओं को रोटी खिलाएं। बुजुर्गों और श्रमिकों की सेवा करें। साढ़े साती गाइड भी अवश्य पढ़ें।

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8. राहु (North Node) — माया और भ्रम का कारक

संस्कृत: राहुदेव / स्वर्भानु | छाया ग्रह | वर्तमान स्थिति: मीन राशि (2026)

बीज मंत्र:

ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः

वैदिक मंत्र:

ॐ अर्धकायं महावीर्यं चन्द्रादित्यविमर्दनम्। सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्॥

दिन
शनिवार
रंग
गहरा नीला / काला
रत्न
गोमेद
धातु
सीसा / पंचधातु
जाप संख्या
18,000
दान (शनिवार): उड़द दाल, नारियल, कंबल, सरसों, काले तिल। राहु काल में दान विशेष फलदायी।

राहु छाया ग्रह है — यह भौतिक इच्छाओं, विदेश यात्रा, तकनीक, अचानक परिवर्तन, राजनीति और भ्रम का कारक है। पीड़ित राहु से मानसिक उलझन, झूठ, नशे की प्रवृत्ति और अचानक हानि होती है। उपाय: राहु काल में शुभ कार्यों से बचें। शनिवार रात दुर्गा चालीसा पाठ करें। सर्प मंदिर में नारियल अर्पित करें। काल सर्प दोष हो तो विशेष पूजा कराएं।

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9. केतु (South Node) — मोक्ष और आध्यात्मिकता का कारक

संस्कृत: केतुदेव | छाया ग्रह | वर्तमान स्थिति: कन्या राशि (2026)

बीज मंत्र:

ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

वैदिक मंत्र:

ॐ पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रहमस्तकम्। रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्॥

दिन
मंगलवार
रंग
भूरा / धूम्र
रत्न
लहसुनिया
धातु
लोहा / पंचधातु
जाप संख्या
17,000
दान (मंगलवार): तिल, कंबल, सप्तधान्य (7 अनाज), भूरे वस्त्र, लोहे की वस्तुएं।

केतु मोक्ष, आध्यात्मिकता, वैराग्य, अंतर्ज्ञान, रहस्य और पिछले जन्मों के कर्मों का कारक है। पीड़ित केतु से अचानक रोग, रहस्यमय बीमारियां और अकारण भय होता है। उपाय: मंगलवार को गणेश जी की पूजा और "ॐ गं गणपतये नमः" का जाप करें। कुत्ते को रोटी खिलाएं। गाय के घर में सप्तधान्य दान करें। ध्यान-साधना केतु को सशक्त बनाती है।

नवग्रह स्तोत्र — सभी 9 ग्रहों की एकसाथ शांति

नवग्रह स्तोत्र सभी 9 ग्रहों की एकसाथ स्तुति करता है। व्यास मुनि द्वारा रचित यह स्तोत्र सभी ग्रह दोषों को शांत करता है। प्रतिदिन सूर्योदय के समय या किसी भी पूजा के आरंभ में इसका पाठ करें:

॥ श्री नवग्रह स्तोत्र ॥

☀️ सूर्य:

जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महद्युतिम्।
तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥

🌙 चंद्र:

दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसंभवम्।
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥

🔴 मंगल:

धरणीगर्भसंभूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्।
कुमारं शक्तिहस्तं च मंगलं प्रणमाम्यहम्॥

💚 बुध:

प्रियंगुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम्॥

🟡 बृहस्पति:

देवानां च ऋषीणां च गुरुं कांचनसन्निभम्।
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥

💎 शुक्र:

हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्।
सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्॥

🪐 शनि:

नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

🌑 राहु:

अर्धकायं महावीर्यं चन्द्रादित्यविमर्दनम्।
सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्॥

🔥 केतु:

पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रहमस्तकम्।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्॥

॥ इति श्री नवग्रह स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

नवग्रह मंत्र त्वरित सारणी

☀️ सूर्यॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमःरविवारमाणिक्य7,000
🌙 चंद्रॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमःसोमवारमोती11,000
🔴 मंगलॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमःमंगलवारमूंगा10,000
💚 बुधॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमःबुधवारपन्ना9,000
🟡 बृहस्पतिॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमःगुरुवारपुखराज19,000
💎 शुक्रॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमःशुक्रवारहीरा16,000
🪐 शनिॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमःशनिवारनीलम23,000
🌑 राहुॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमःशनिवारगोमेद18,000
🔥 केतुॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमःमंगलवारलहसुनिया17,000

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवग्रह मंत्र कब जपने चाहिए?

नवग्रह मंत्र सूर्योदय के समय या संबंधित ग्रह के दिन जपने चाहिए। ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से 1.5 घंटे पहले) सर्वोत्तम समय है। सूर्य मंत्र रविवार सुबह, चंद्र मंत्र सोमवार, मंगल मंत्र मंगलवार और इसी क्रम में। स्नान करके, आसन पर बैठकर, पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करके जपें।

नवग्रह मंत्र कितनी बार जपने चाहिए?

प्रतिदिन न्यूनतम 108 बार (एक माला) जपें। विशेष फल के लिए 40 दिन का अनुष्ठान करें — प्रतिदिन 108 बार, बिना कोई दिन छोड़े। पूर्ण सिद्धि के लिए प्रत्येक ग्रह की निर्धारित संख्या (7000 से 23000 बार) पूरी करें। मालिका (रुद्राक्ष या स्फटिक) से गिनती रखें।

क्या बिना पंडित के नवग्रह मंत्र जप सकते हैं?

हां, बीज मंत्र और वैदिक मंत्र कोई भी श्रद्धापूर्वक जप सकता है। स्नान करके, आसन पर बैठकर, माला से गिनती रखते हुए जपें। हालांकि, नवग्रह होम, यंत्र प्रतिष्ठा और रत्न धारण के लिए योग्य ज्योतिषी और पंडित से परामर्श अवश्य लें। बिना कुंडली देखे रत्न पहनना हानिकारक हो सकता है।

सबसे शक्तिशाली नवग्रह मंत्र कौन सा है?

नवग्रह स्तोत्र (जपाकुसुमसंकाशं...) सबसे शक्तिशाली है क्योंकि इसमें सभी 9 ग्रहों की स्तुति है। व्यक्तिगत ग्रह शांति के लिए उस ग्रह का बीज मंत्र सबसे प्रभावी है। गायत्री मंत्र सूर्य का और महामृत्युंजय मंत्र राहु-केतु शांति का सर्वोत्तम उपाय है।

कौन से ग्रह के लिए कौन सा रत्न पहनें?

सूर्य-माणिक्य, चंद्र-मोती, मंगल-मूंगा, बुध-पन्ना, बृहस्पति-पुखराज, शुक्र-हीरा, शनि-नीलम, राहु-गोमेद, केतु-लहसुनिया। लेकिन बिना कुंडली विश्लेषण के कोई भी रत्न न पहनें। गलत रत्न हानिकारक हो सकता है। पहले GrahaGuru पर मुफ्त कुंडली बनवाएं।

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