मुहूर्त - शुभ समय की सम्पूर्ण जानकारी

यह खंड किस काम आता है

मुहूर्त वैदिक ज्योतिष की वह गणना है जो बताती है कि कोई कार्य किस समय शुरू करना अनुकूल रहेगा। यह गणना पंचांग के पांच अंगों तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इनके साथ लग्न और चंद्रमा की स्थिति भी देखी जाती है, क्योंकि हर कार्य के लिए अलग नक्षत्र और अलग लग्न शुभ माने जाते हैं।

यह खंड उन लोगों के लिए है जिन्हें किसी संस्कार या नई शुरुआत की तारीख तय करनी है, जैसे शादी की तिथि, नए घर में प्रवेश, शिशु का नामकरण, वाहन खरीद या व्यापार का आरंभ। नीचे दिए हर पेज में महीने अनुसार शुभ तिथियां, उपयुक्त नक्षत्र, समय की अवधि और वर्जित काल दिए गए हैं। रोज़ की तिथि, नक्षत्र और राहु काल देखने के लिए आज का पंचांग पेज भी इसी खंड में है।

रोज़ का पंचांग

किसी भी मुहूर्त की अंतिम पुष्टि उस दिन के पंचांग से होती है। तिथि और नक्षत्र बदलने का समय हर दिन अलग रहता है, इसलिए काम शुरू करने से पहले उस दिन का राहु काल और अभिजित मुहूर्त देख लेना उचित है।

पंचांग के पांच अंग

  1. तिथि - चंद्र दिवस, शुक्ल और कृष्ण पक्ष में 15-15
  2. वार - सप्ताह का दिन, हर दिन का स्वामी ग्रह अलग
  3. नक्षत्र - चंद्रमा जिस तारामंडल में है, कुल 27
  4. योग - सूर्य और चंद्र की दूरी से बनने वाले 27 योग
  5. करण - तिथि का आधा भाग, कुल 11 करण

इनके अलावा लग्न, चंद्र राशि और अमृत सिद्धि, सर्वार्थ सिद्धि जैसे विशेष योग भी मुहूर्त की गुणवत्ता तय करते हैं।

ध्यान दें: इस खंड के मुहूर्त पेज वर्ष 2025 के हैं। वर्ष 2026 की शुभ तिथियों के लिए शुभ तिथि कैलेंडर 2026 देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मुहूर्त क्या होता है?
मुहूर्त वह शुभ समय है जिसमें ग्रह और नक्षत्र किसी कार्य के अनुकूल माने जाते हैं। वैदिक गणना में एक मुहूर्त लगभग 48 मिनट का होता है और पूरे दिन में 30 मुहूर्त माने जाते हैं। परंपरा के अनुसार शुभ मुहूर्त में शुरू किया गया कार्य कम बाधा के साथ आगे बढ़ता है।
शुभ मुहूर्त निकालते समय क्या देखा जाता है?
पंचांग के पांच अंग देखे जाते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इनके साथ लग्न, चंद्र राशि और कार्य से जुड़े विशेष योग जैसे अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और द्विपुष्कर योग की भी जांच की जाती है।
किस समय शुभ कार्य नहीं किए जाते?
खर मास या मलमास, होलाष्टक, पितृ पक्ष, चातुर्मास की कुछ अवधि और ग्रहण का समय शुभ कार्यों के लिए वर्जित माने जाते हैं। दिन के भीतर राहु काल, यमगंड और गुलिक काल को भी टाला जाता है।
क्या मुहूर्त का समय हर शहर में एक जैसा होता है?
तिथि और नक्षत्र पूरे देश में लगभग एक जैसे रहते हैं, पर सूर्योदय और सूर्यास्त शहर के अनुसार बदलते हैं। इसलिए राहु काल, अभिजित मुहूर्त और लग्न का समय हर शहर में अलग होता है। अंतिम समय तय करने से पहले अपने शहर का पंचांग देखें।

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