आज का पंचांग

दैनिक पंचांग हिंदी में | Today's Panchang with Shubh Muhurat

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आज का दिन

सोमवार, 23 दिसंबर 2025

पौष मास | शुक्ल पक्ष

पंचांग क्या है?

पंचांग (Panchang) संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है "पांच अंग"। यह हिंदू वैदिक कैलेंडर सिस्टम है जो पांच प्रमुख खगोलीय तत्वों पर आधारित है। पंचांग का उपयोग शुभ मुहूर्त, त्योहार, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान निर्धारित करने के लिए किया जाता है।

Panchang (Hindu Calendar) is based on five elements: Tithi (lunar day), Var (weekday), Nakshatra (lunar mansion/constellation), Yoga (luni-solar day), and Karana (half of Tithi). It's an essential tool in Vedic astrology for determining auspicious times (Muhurat) for important activities, religious ceremonies, and understanding daily cosmic influences.

प्राचीन काल से ही भारतीय समाज में पंचांग का महत्वपूर्ण स्थान है। यह केवल तिथियां बताने का साधन नहीं, बल्कि जीवन को ब्रह्मांडीय लय के साथ संरेखित करने का विज्ञान है।

पंचांग के पांच अंग

1. तिथि (Tithi)

परिभाषा: चंद्र दिवस। सूर्य और चंद्रमा के बीच 12 डिग्री का कोणीय अंतर एक तिथि बनाता है। एक महीने में 30 तिथियां होती हैं - 15 शुक्ल पक्ष (वृद्धि) और 15 कृष्ण पक्ष (क्षय)।

30 तिथियां:

शुक्ल पक्ष: प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा

कृष्ण पक्ष: प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या

महत्व: विभिन्न तिथियां विभिन्न कार्यों के लिए शुभ/अशुभ होती हैं। एकादशी उपवास के लिए, पूर्णिमा पूजा के लिए, अमावस्या पितृ तर्पण के लिए विशेष महत्वपूर्ण है।

2. वार (Var/Weekday)

परिभाषा: सप्ताह के सात दिन, प्रत्येक एक ग्रह द्वारा शासित।

रविवार: सूर्य - धार्मिक कार्य, पिता से संबंधित
सोमवार: चंद्र - मां, शिव पूजा, मन से संबंधित
मंगलवार: मंगल - साहस, संपत्ति, युद्ध
बुधवार: बुध - शिक्षा, व्यापार, विद्या
गुरुवार: बृहस्पति - विवाह, धन, ज्ञान
शुक्रवार: शुक्र - प्रेम, सुख, कला, वाहन
शनिवार: शनि - कठोर परिश्रम, न्याय, सेवा

3. नक्षत्र (Nakshatra)

परिभाषा: चंद्र मंडल को 27 भागों में बांटा गया है, प्रत्येक भाग एक नक्षत्र है। चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र में रहता है।

27 नक्षत्र:

अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती

उपयोग: जन्म नक्षत्र व्यक्तित्व निर्धारित करता है। नक्षत्र के आधार पर नामकरण, विवाह मुहूर्त और गुण मिलान होता है।

4. योग (Yoga)

परिभाषा: सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त गति से बनने वाला विशेष संयोजन। कुल 27 योग होते हैं।

शुभ योग: सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इंद्र, वैधृति (विशेष परिस्थितियों में), ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यतीपात (विशेष), वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, अमृत

अशुभ योग: व्यतीपात, वैधृति, गंड - इन योगों में महत्वपूर्ण कार्य टालने चाहिए।

5. करण (Karana)

परिभाषा: तिथि का आधा भाग। एक तिथि में दो करण होते हैं। कुल 11 करण हैं - 4 स्थिर और 7 चर।

चर करण (7): बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि (भद्रा) - ये बार-बार दोहराते हैं

स्थिर करण (4): शकुनि, चतुष्पाद, नाग, किंस्तुघ्न - ये महीने में एक बार आते हैं

विशेष: विष्टि (भद्रा) करण अशुभ माना जाता है। इस समय नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

पंचांग की अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

राहु काल (Rahu Kaal)

प्रतिदिन का अशुभ समय जब कोई नया शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। प्रत्येक दिन के लिए अलग समय:

रविवार: 16:30-18:00

सोमवार: 07:30-09:00

मंगलवार: 15:00-16:30

बुधवार: 12:00-13:30

गुरुवार: 13:30-15:00

शुक्रवार: 10:30-12:00

शनिवार: 09:00-10:30

नोट: समय सूर्योदय-सूर्यास्त के आधार पर बदलता है।

गुलिक काल (Gulik Kaal)

राहु काल के समान अशुभ समय। शनि के पुत्र गुलिक द्वारा शासित। इस समय भी शुभ कार्य टालें।

यमगंड (Yamaganda)

यम का समय। तीसरा अशुभ काल। दीर्घ यात्रा और महत्वपूर्ण निर्णय इस समय से बचें।

अभिजीत मुहूर्त (Abhijit Muhurat)

दोपहर का शुभ समय (लगभग 12:00-13:00)। यह स्वतः शुभ होता है और किसी भी दिन उपलब्ध रहता है। छोटे शुभ कार्यों के लिए आदर्श।

हिंदू कैलेंडर - मास और ऋतुएं

12 हिंदू मास

चैत्र

मार्च-अप्रैल | वसंत

वैशाख

अप्रैल-मई | वसंत

ज्येष्ठ

मई-जून | ग्रीष्म

आषाढ़

जून-जुलाई | ग्रीष्म

श्रावण

जुलाई-अगस्त | वर्षा

भाद्रपद

अगस्त-सितंबर | वर्षा

आश्विन

सितंबर-अक्टूबर | शरद

कार्तिक

अक्टूबर-नवंबर | शरद

मार्गशीर्ष

नवंबर-दिसंबर | हेमंत

पौष

दिसंबर-जनवरी | हेमंत

माघ

जनवरी-फरवरी | शिशिर

फाल्गुन

फरवरी-मार्च | शिशिर

पंचांग का उपयोग

शुभ मुहूर्त निकालना

  • विवाह के लिए उपयुक्त तिथि-नक्षत्र
  • गृह प्रवेश का समय
  • व्यापार उद्घाटन
  • वाहन खरीद
  • यात्रा प्रारंभ

धार्मिक अनुष्ठान

  • व्रत और उपवास की तिथियां
  • त्योहारों की जानकारी
  • पूजा का उचित समय
  • तीर्थ यात्रा योजना
  • पितृ तर्पण

ज्योतिषीय गणना

  • जन्म कुंडली बनाना
  • दशा गणना
  • ग्रह गोचर जानना
  • वार्षिक फलादेश

दैनिक जीवन

  • दिन की योजना बनाना
  • अशुभ समय से बचना
  • शुभ कार्य का समय चुनना
  • स्वास्थ्य सलाह

पंचांग में विशेष तिथियां और योग

सर्वार्थ सिद्धि योग

विशेष शुभ योग जब तिथि, वार और नक्षत्र का अद्भुत संयोग होता है। इस समय सभी कार्य सफल होते हैं।

अमृत सिद्धि योग

अमृत के समान शुभ योग। दुर्लभ संयोजन। इस समय किया गया कार्य अमर फल देता है।

द्विपुष्कर योग

दोगुना शुभ फल देने वाला योग। धार्मिक कार्य, दान के लिए उत्तम।

त्रिपुष्कर योग

तिगुना शुभ फल। अत्यंत दुर्लभ। जीवन में कुछ ही बार आता है।

पंचक योग

पांच विशेष नक्षत्रों (धनिष्ठा के अंतिम चरण से रेवती तक) का समय। इसमें दक्षिण दिशा यात्रा, घर निर्माण, बिस्तर खरीदना वर्जित है।

FAQ

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर सिस्टम है जो पांच तत्वों पर आधारित है: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (तारामंडल), योग और करण। यह शुभ मुहूर्त और धार्मिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है।

आज का पंचांग क्यों देखना चाहिए?

पंचांग से आप शुभ समय, अशुभ समय (राहु काल), त्योहार, व्रत और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए उपयुक्त मुहूर्त जान सकते हैं। यह दैनिक जीवन की योजना बनाने में मदद करता है।

राहु काल क्या है?

राहु काल प्रतिदिन का लगभग 1.5 घंटे का अशुभ समय है। इस दौरान नया कार्य, यात्रा, महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लेने चाहिए। प्रत्येक दिन के लिए अलग समय होता है।

अभिजीत मुहूर्त क्या है?

अभिजीत मुहूर्त दोपहर का शुभ समय है (लगभग 12:00-13:00 बजे)। यह हर दिन स्वतः शुभ माना जाता है। छोटे-मोटे शुभ कार्यों के लिए विशेष मुहूर्त निकाले बिना इस समय का उपयोग किया जा सकता है।

आज का पूर्ण पंचांग देखें

तिथि, नक्षत्र, योग, करण और शुभ मुहूर्त

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