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खगोलीय घटना

ग्रहण 2026 — सूर्य व चंद्र ग्रहण की तारीखें, सूतक काल और राशि प्रभाव

2026 में 4 ग्रहण — कौन से भारत में दिखेंगे, सूतक कब लगेगा और आपकी राशि पर क्या असर

13 मार्च 2026 12 मिनट पढ़ने का समय

ग्रहण 2026 — मुख्य तथ्य

1. 2026 में कुल 4 ग्रहण — 2 सूर्य + 2 चंद्र
2. 3 मार्च 2026: पूर्ण चंद्र ग्रहण — भारत में पूरी तरह दृश्य
3. चंद्र ग्रहण सूतक: ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू
4. सूर्य ग्रहण सूतक: ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू
5. सर्वाधिक प्रभावित: सिंह और कुंभ राशि
6. अदृश्य ग्रहणों का सूतक भारत में मान्य नहीं

ग्रहण क्या है — ज्योतिष और विज्ञान

ग्रहण (Eclipse) वह खगोलीय घटना है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं। वैदिक ज्योतिष में ग्रहण को राहु और केतु की छाया से जोड़ा गया है। राहु (उत्तरी चंद्र नोड) और केतु (दक्षिणी चंद्र नोड) वे बिंदु हैं जहां चंद्रमा की कक्षा सूर्य की कक्षा को काटती है। जब सूर्य या चंद्रमा इन बिंदुओं के निकट होते हैं और पूर्ण-चंद्र या अमावस्या का संयोग होता है — तब ग्रहण होता है।

हिंदू धर्म में ग्रहण काल को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पुराणों में वर्णित है कि ग्रहण के समय किया गया मंत्र जाप, दान और पूजा-पाठ सामान्य समय की तुलना में हजारों गुना अधिक फलदायी होता है। साथ ही, सूतक काल में भोजन, शुभ कार्य और धार्मिक अनुष्ठान वर्जित माने जाते हैं।

2026 ग्रहण — एक नज़र में

तारीख प्रकार राशि भारत में
17 फरवरी 2026 कंकणाकृति सूर्य ग्रहण कुंभ अदृश्य
3 मार्च 2026 पूर्ण चंद्र ग्रहण सिंह पूर्ण दृश्य ✓
12 अगस्त 2026 पूर्ण सूर्य ग्रहण सिंह अदृश्य
28 अगस्त 2026 आंशिक चंद्र ग्रहण कुंभ आंशिक दृश्य

1. कंकणाकृति सूर्य ग्रहण — 17 फरवरी 2026

प्रकार: कंकणाकृति (Annular) सूर्य ग्रहण

राशि: कुंभ (Aquarius) — शतभिषा नक्षत्र

भारत में दृश्यता: नहीं — भारत में यह ग्रहण अदृश्य है

दृश्य क्षेत्र: दक्षिण अमेरिका (पेरू, बोलीविया, अर्जेंटीना), अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका के कुछ भाग

भारत में सूतक: भारत में अदृश्य होने के कारण सूतक मान्य नहीं

कंकणाकृति सूर्य ग्रहण क्या होता है?

जब चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत दूर होता है, तो वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता। इस स्थिति में सूर्य के बाहरी छल्ले (annulus — कंकण) चारों ओर दृश्य रहते हैं — इसे कंकणाकृति ग्रहण कहते हैं। यह "रिंग ऑफ फायर" की तरह दिखता है।

ज्योतिषीय प्रभाव: यह ग्रहण कुंभ राशि में राहु के निकट होगा। कुंभ, मकर और मेष राशि वाले सतर्क रहें। भारत में अदृश्य होने के कारण प्रत्यक्ष सूतक प्रभाव नहीं, परंतु ग्रहण काल में किया गया मानसिक मंत्र जाप लाभकारी है।

2. पूर्ण चंद्र ग्रहण — 3 मार्च 2026 (भारत में दृश्य!)

भारत में पूर्ण दृश्य — सूतक मान्य

प्रकार: पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse)

राशि: सिंह (Leo) — मघा/पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र

भारत में दृश्यता: हां — पूरे भारत में स्पष्ट दृश्य

ग्रहण स्पर्श (IST): लगभग रात 9:30 बजे

मध्य ग्रहण (IST): लगभग रात 11:45 बजे

ग्रहण मोक्ष (IST): लगभग रात 2:00 बजे (4 मार्च)

सूतक काल — 3 मार्च 2026

चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले शुरू होता है। ग्रहण स्पर्श रात ~9:30 बजे → सूतक दोपहर ~12:30 बजे से शुरू।

  • सूतक प्रारंभ: 3 मार्च, दोपहर लगभग 12:30 बजे (IST)
  • सूतक समाप्त: 4 मार्च, रात लगभग 2:00 बजे (ग्रहण मोक्ष पर)
  • ग्रहण काल में: भगवन्नाम जाप, विष्णु सहस्रनाम, महामृत्युंजय मंत्र जपें
  • ग्रहण के बाद: स्नान कर दान-पुण्य करें

यह ग्रहण सिंह राशि में पूर्णिमा के दिन होगा। पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा पृथ्वी की छाया में पूरी तरह प्रवेश कर जाता है और लाल-नारंगी रंग का दिखता है — इसे "Blood Moon" भी कहते हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से सिंह राशि वालों के लिए यह ग्रहण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। राहु-केतु अक्ष पर होने वाला यह ग्रहण राजनीति, नेतृत्व और सत्ता से जुड़े मामलों में बदलाव ला सकता है।

3. पूर्ण सूर्य ग्रहण — 12 अगस्त 2026

प्रकार: पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse)

राशि: सिंह (Leo) — मघा नक्षत्र

भारत में दृश्यता: नहीं — भारत में अदृश्य

दृश्य क्षेत्र: उत्तरी स्पेन, पाइरेनीज़, फ्रांस का एक छोटा हिस्सा, आर्कटिक क्षेत्र, रूस का उत्तरी भाग, ग्रीनलैंड

भारत में सूतक: अदृश्य — भारत में सूतक मान्य नहीं

यह सूर्य ग्रहण 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण पूर्ण सूर्य ग्रहणों में से एक होगा। यूरोप में लाखों लोग इस दुर्लभ घटना के साक्षी बनेंगे। ज्योतिषीय दृष्टि से यह ग्रहण सिंह राशि में केतु के निकट होगा — यह पिछले मार्च के चंद्र ग्रहण की ही ऊर्जा को पुनः सक्रिय करेगा। सिंह राशि के लिए अगस्त 2026 अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा — विशेषकर करियर, यश और नेतृत्व में बड़े बदलाव।

भारत में: यद्यपि यह ग्रहण दृश्य नहीं होगा, परंतु इसके तीन दिन पहले और बाद तक विशेष मंत्र जाप और दान अत्यंत शुभ माना जाता है।

4. आंशिक चंद्र ग्रहण — 28 अगस्त 2026

भारत में आंशिक दृश्य

प्रकार: आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse)

राशि: कुंभ (Aquarius) — शतभिषा नक्षत्र

भारत में दृश्यता: आंशिक — पूर्वी और दक्षिणी भारत से बेहतर दृश्य

ग्रहण प्रारंभ (IST): लगभग रात 11:00 बजे

मध्य ग्रहण (IST): लगभग रात 12:30 बजे (29 अगस्त)

सूतक: आंशिक दृश्यता के आधार पर स्थानीय विद्वान से पूछें

यह ग्रहण कुंभ राशि में होगा — अगस्त के सूर्य ग्रहण (सिंह) से ठीक दो सप्ताह बाद। दोनों ग्रहण मिलकर सिंह-कुंभ धुरी को सक्रिय करेंगे। कुंभ, सिंह, वृषभ और वृश्चिक राशि वाले इस ग्रहण से विशेष रूप से प्रभावित होंगे। मकर और मेष राशि को मध्यम प्रभाव।

सूतक काल — नियम और मान्यताएं

🚫 सूतक काल में क्या न करें

  • भोजन न पकाएं और न खाएं (बीमार, बुजुर्ग और बच्चे अपवाद)
  • नए शुभ कार्य आरंभ न करें
  • देव प्रतिमाओं को स्पर्श न करें
  • सोना नहीं (यदि संभव हो)
  • मांस-मदिरा का सेवन वर्जित
  • गर्भवती महिलाएं घर के अंदर रहें
  • सुई-धागा, चाकू-कैंची का प्रयोग न करें (गर्भिणी)

✅ ग्रहण काल में क्या करें

  • मंत्र जाप: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या महामृत्युंजय
  • विष्णु सहस्रनाम या हनुमान चालीसा पाठ
  • ध्यान और प्राणायाम करें
  • ग्रहण के बाद: स्नान अवश्य करें
  • तिल, गुड़, वस्त्र का दान करें
  • पके हुए भोजन में तुलसी पत्र डालें (संरक्षण)
  • ग्रहण के बाद देव दर्शन शुभ

2026 के ग्रहणों का 12 राशियों पर प्रभाव

2026 के ग्रहण मुख्यतः सिंह-कुंभ अक्ष पर केंद्रित हैं। इन राशियों के लोगों के जीवन में 2026 में बड़े परिवर्तन आ सकते हैं। नीचे संक्षिप्त प्रभाव दिया गया है:

🔴 अधिक सावधानी चाहिए

सिंह (Leo): ग्रहण सीधे जन्म राशि पर — स्वास्थ्य, पहचान और करियर में उथल-पुथल। ध्यान और मंत्र जाप आवश्यक।

कुंभ (Aquarius): ग्रहण सातवें भाव से — संबंध, साझेदारी और विवाह में तनाव। धैर्य रखें।

वृश्चिक (Scorpio): दसवें और चौथे भाव से ग्रहण — करियर और घर-परिवार में बदलाव।

वृषभ (Taurus): चौथे और दसवें भाव से — संपत्ति और पेशे में उतार-चढ़ाव।

🟢 सकारात्मक परिवर्तन संभव

मेष (Aries): पांचवें और ग्यारहवें भाव से — संतान, प्रेम और लाभ में शुभता।

धनु (Sagittarius): तीसरे और नौवें भाव से — यात्रा, शिक्षा और भाग्य में सुधार।

मिथुन (Gemini): तीसरे और नौवें भाव से — साहस और धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि।

तुला (Libra): ग्यारहवें और पांचवें से — आय और रचनात्मकता में वृद्धि।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

खगोल विज्ञान के अनुसार ग्रहण पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के संरेखण की सामान्य खगोलीय घटना है। सूर्य ग्रहण के समय सौर विकिरण में परिवर्तन होता है और UV किरणें बढ़ सकती हैं — इसीलिए नंगी आंखों से सूर्य ग्रहण न देखें। पूर्ण सूर्य ग्रहण के समय का तापमान अचानक गिर जाता है और पशु-पक्षी असामान्य व्यवहार करते हैं। ये वैज्ञानिक तथ्य हैं। सूतक और अन्य मान्यताएं हिंदू सांस्कृतिक-धार्मिक परंपराएं हैं जिनका पालन श्रद्धा और आस्था के अनुसार किया जाता है।

ग्रहण के उपाय — मंत्र और दान

🕉️ मंत्र जाप

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

ग्रहण काल में 108 बार

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

🙏 दान और पुण्य

  • • तिल, गुड़ और काले वस्त्र का दान
  • • गरीबों को भोजन कराएं
  • • गौ माता को हरा चारा
  • • ब्राह्मण को दक्षिणा
  • • नदी में तिल अर्पण
  • • मंदिर में फल-फूल चढ़ाएं

🏠 घर में करें

  • • भोजन और पानी में तुलसी पत्र
  • • देव प्रतिमाओं पर आवरण चढ़ाएं
  • • घर में गोबर से लेप (परंपरागत)
  • • ग्रहण के बाद पूरे घर की सफाई
  • • गंगाजल से घर का शुद्धिकरण
  • • ग्रहण बाद स्नान अनिवार्य

ग्रहण — परंपरा और श्रद्धा का मिलन

ग्रहण खगोलीय दृष्टि से एक नियमित घटना है, परंतु भारतीय सनातन परंपरा में यह अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर है। पूर्णिमा और अमावस्या पर होने वाले ग्रहण ऊर्जात्मक रूप से अत्यंत शक्तिशाली होते हैं। इस समय किया गया मंत्र जाप, दान और साधना सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फल देता है — यह हमारे शास्त्रों की मान्यता है। 3 मार्च 2026 का पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत के लिए एक विशेष अवसर है — इसे साधना और पुण्य संचय के लिए उपयोग करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में कुल कितने ग्रहण होंगे?

2026 में कुल 4 ग्रहण होंगे — 2 सूर्य ग्रहण (17 फरवरी और 12 अगस्त) और 2 चंद्र ग्रहण (3 मार्च और 28 अगस्त)। इनमें से 3 मार्च का पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत में पूरी तरह दृश्य होगा। 17 फरवरी और 12 अगस्त के सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेंगे।

2026 में कौन सा ग्रहण भारत में दिखेगा?

3 मार्च 2026 का पूर्ण चंद्र ग्रहण पूरे भारत में स्पष्ट रूप से दिखेगा। यह रात के समय होगा — ग्रहण स्पर्श लगभग रात 9:30 बजे और मध्य ग्रहण रात 11:45 बजे के आसपास होगा। 28 अगस्त का आंशिक चंद्र ग्रहण भारत के कुछ हिस्सों में देर रात दिख सकता है।

सूतक काल क्या होता है और कब शुरू होता है?

सूतक ग्रहण से पहले का वह समय है जब भोजन, शुभ कार्य और कुछ धार्मिक क्रियाएं वर्जित होती हैं। चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले और सूर्य ग्रहण का 12 घंटे पहले शुरू होता है। जो ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है उसका सूतक भारत में मान्य नहीं होता। बच्चे, बीमार और बुजुर्गों को सूतक के नियमों में छूट दी जाती है।

ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को क्या करना चाहिए?

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार गर्भवती महिलाएं ग्रहण काल में घर के अंदर रहें, सीधे ग्रहण न देखें, कैंची-चाकू का उपयोग न करें और 'ॐ देवकीसुत गोविंद...' मंत्र जपती रहें। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से न देखना महत्वपूर्ण है। अन्य मान्यताएं सांस्कृतिक परंपराएं हैं।

2026 के ग्रहण से कौन सी राशियां सबसे अधिक प्रभावित होंगी?

2026 के ग्रहण मुख्यतः सिंह-कुंभ धुरी पर केंद्रित हैं। सिंह, कुंभ, वृश्चिक और वृषभ राशि वाले सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इन राशियों के जातकों को 2026 में बड़े जीवन परिवर्तन आ सकते हैं — करियर, संबंध और निवास स्थान में बदलाव। मेष, धनु और मिथुन को अपेक्षाकृत शुभ परिणाम मिल सकते हैं।

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ग्रहण आपकी कुंडली पर क्या असर डालेगा?

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