Read in English
GrahaGuru ग्रहगुरु
नक्षत्र ज्ञान

27 नक्षत्र — नाम, स्वामी, गण, योनि और विशेषताएं

संपूर्ण नक्षत्र गाइड — जन्म नक्षत्र से विंशोत्तरी दशा, नाम अक्षर और विवाह मिलान तक

13 मार्च 2026 18 मिनट पढ़ने का समय

नक्षत्र — मुख्य तथ्य

1. 27 नक्षत्र — राशिचक्र के 360° ÷ 27 = प्रत्येक 13°20'
2. प्रत्येक नक्षत्र के 4 पाद — प्रत्येक 3°20' का
3. देव गण: 9, मानव गण: 9, राक्षस गण: 9
4. 27 × 4 = 108 पाद — 108 नाम अक्षर
5. 9 ग्रह × 3 नक्षत्र = विंशोत्तरी दशा का आधार
6. 28वां नक्षत्र अभिजित — केवल मुहूर्त गणना में

नक्षत्र क्या हैं?

नक्षत्र (Nakshatra) वैदिक ज्योतिष की एक अनूठी अवधारणा है। राशिचक्र के 360 अंशों को 27 बराबर भागों में बांटा गया है — प्रत्येक भाग 13 अंश 20 कला (13°20') का है। इन्हीं 27 भागों को नक्षत्र कहते हैं। ये वे तारा-समूह हैं जिनके निकट से चंद्रमा एक माह में गुजरता है — चंद्रमा प्रतिदिन लगभग एक नक्षत्र पार करता है।

नक्षत्र वैदिक काल से खगोलीय गणनाओं का आधार रहे हैं। अथर्ववेद, ऋग्वेद और बृहत्संहिता में नक्षत्रों का विस्तृत वर्णन मिलता है। आधुनिक ज्योतिष में नक्षत्र का उपयोग — जन्म नक्षत्र निर्धारण, विंशोत्तरी दशा गणना, विवाह मिलान, मुहूर्त चुनाव और नाम रखने में होता है।

महत्वपूर्ण: नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति से देखा जाता है। आपका जन्म नक्षत्र (Janma Nakshatra) वह नक्षत्र है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा स्थित था। अपना जन्म नक्षत्र जानने के लिए मुफ्त कुंडली बनाएं।

27 नक्षत्र — संपूर्ण सूची

नीचे सभी 27 नक्षत्रों का क्रम, उनके ग्रह स्वामी, गण, योनि (animal symbol) और प्रारंभिक अंश दिए गए हैं:

# नक्षत्र अंग्रेज़ी स्वामी गण योनि राशि (पाद)
1अश्विनीAshwiniकेतुदेवअश्व (घोड़ा)मेष 0°–13°20'
2भरणीBharaniशुक्रमानवगज (हाथी)मेष 13°20'–26°40'
3कृत्तिकाKrittikaरविराक्षसमेष (भेड़)मेष–वृषभ
4रोहिणीRohiniचंद्रमानवसर्पवृषभ 10°–23°20'
5मृगशिराMrigashiraमंगलदेवसर्पवृषभ–मिथुन
6आर्द्राArdraराहुमानवकुत्ता (श्वान)मिथुन 6°40'–20°
7पुनर्वसुPunarvasuगुरुदेवबिल्लीमिथुन–कर्क
8पुष्यPushyaशनिदेवभेड़कर्क 3°20'–16°40'
9आश्लेषाAshleshaबुधराक्षसबिल्लीकर्क 16°40'–30°
10मघाMaghaकेतुराक्षसचूहासिंह 0°–13°20'
11पूर्वाफाल्गुनीPurva Phalguniशुक्रमानवचूहासिंह 13°20'–26°40'
12उत्तराफाल्गुनीUttara Phalguniरविमानवगाय (वृषभ)सिंह–कन्या
13हस्तHastaचंद्रदेवभैंसकन्या 10°–23°20'
14चित्राChitraमंगलराक्षसबाघकन्या–तुला
15स्वातीSwatiराहुदेवभैंसतुला 6°40'–20°
16विशाखाVishakhaगुरुराक्षसबाघतुला–वृश्चिक
17अनुराधाAnuradhaशनिदेवमृग (हिरण)वृश्चिक 3°20'–16°40'
18ज्येष्ठाJyeshthaबुधराक्षसमृग (हिरण)वृश्चिक 16°40'–30°
19मूलMulaकेतुराक्षसकुत्ता (श्वान)धनु 0°–13°20'
20पूर्वाषाढ़ाPurva Ashadhaशुक्रमानवबंदरधनु 13°20'–26°40'
21उत्तराषाढ़ाUttara Ashadhaरविमानवनेवलाधनु–मकर
22श्रवणShravanaचंद्रदेवबंदरमकर 10°–23°20'
23धनिष्ठाDhanishthaमंगलराक्षससिंह (शेर)मकर–कुंभ
24शतभिषाShatabhishaराहुराक्षसघोड़ाकुंभ 6°40'–20°
25पूर्वाभाद्रपदPurva Bhadrapadaगुरुमानवसिंह (शेर)कुंभ–मीन
26उत्तराभाद्रपदUttara Bhadrapadaशनिमानवगाय (धेनु)मीन 3°20'–16°40'
27रेवतीRevatiबुधदेवहाथीमीन 16°40'–30°

तीन गणों के अनुसार नक्षत्र

देव गण (9 नक्षत्र)

शांत, धार्मिक, सेवाभावी स्वभाव

  • • अश्विनी (केतु)
  • • मृगशिरा (मंगल)
  • • पुनर्वसु (गुरु)
  • • पुष्य (शनि)
  • • हस्त (चंद्र)
  • • स्वाती (राहु)
  • • अनुराधा (शनि)
  • • श्रवण (चंद्र)
  • • रेवती (बुध)

मानव गण (9 नक्षत्र)

व्यावहारिक, संतुलित, सामाजिक स्वभाव

  • • भरणी (शुक्र)
  • • रोहिणी (चंद्र)
  • • आर्द्रा (राहु)
  • • पूर्वाफाल्गुनी (शुक्र)
  • • उत्तराफाल्गुनी (रवि)
  • • पूर्वाषाढ़ा (शुक्र)
  • • उत्तराषाढ़ा (रवि)
  • • पूर्वाभाद्रपद (गुरु)
  • • उत्तराभाद्रपद (शनि)

राक्षस गण (9 नक्षत्र)

तीव्र, स्वतंत्र, महत्वाकांक्षी स्वभाव

  • • कृत्तिका (रवि)
  • • आश्लेषा (बुध)
  • • मघा (केतु)
  • • चित्रा (मंगल)
  • • विशाखा (गुरु)
  • • ज्येष्ठा (बुध)
  • • मूल (केतु)
  • • धनिष्ठा (मंगल)
  • • शतभिषा (राहु)

नक्षत्र और विंशोत्तरी दशा

विंशोत्तरी दशा पद्धति वैदिक ज्योतिष की सबसे महत्वपूर्ण दशा प्रणाली है। इसमें 120 वर्षों का एक पूर्ण चक्र होता है। जन्म नक्षत्र के स्वामी ग्रह की महादशा से जीवन का दशा क्रम शुरू होता है। प्रत्येक ग्रह 3 नक्षत्रों का स्वामी है:

केतु — 7 वर्ष

अश्विनी, मघा, मूल

शुक्र — 20 वर्ष

भरणी, पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा

रवि — 6 वर्ष

कृत्तिका, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा

चंद्र — 10 वर्ष

रोहिणी, हस्त, श्रवण

मंगल — 7 वर-ष

मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा

राहु — 18 वर्ष

आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा

गुरु — 16 वर्ष

पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वाभाद्रपद

शनि — 19 वर्ष

पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद

बुध — 17 वर्ष

आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती

कुल: 7+20+6+10+7+18+16+19+17 = 120 वर्ष

विवाह मिलान में नक्षत्र का महत्व

कुंडली मिलान में 36 गुणों में से 8 गुण (22 अंक) सीधे नक्षत्र पर आधारित हैं:

नक्षत्र-आधारित कूट

  • वर्ण (1 अंक): आध्यात्मिक स्तर मिलान
  • वश्य (2 अंक): आकर्षण और नियंत्रण
  • तारा (3 अंक): जन्म नक्षत्र अनुकूलता
  • योनि (4 अंक): शारीरिक अनुकूलता (योनि मिलान)

नक्षत्र-आधारित कूट (जारी)

  • ग्रह मैत्री (5 अंक): नक्षत्र स्वामियों की मित्रता
  • गण (6 अंक): देव/मानव/राक्षस मिलान
  • राशि (7 अंक): नक्षत्र-राशि आधारित मिलान
  • नाड़ी (8 अंक): आदि/मध्य/अंत्य नाड़ी

मुहूर्त में शुभ नक्षत्र

विवाह के लिए

सर्वश्रेष्ठ नक्षत्र:

  • • रोहिणी
  • • मृगशिरा
  • • मघा
  • • उत्तराफाल्गुनी
  • • हस्त
  • • स्वाती
  • • अनुराधा
  • • मूल
  • • उत्तराषाढ़ा
  • • उत्तराभाद्रपद
  • • रेवती

गृह प्रवेश के लिए

शुभ नक्षत्र:

  • • अश्विनी
  • • रोहिणी
  • • मृगशिरा
  • • पुनर्वसु
  • • पुष्य
  • • उत्तराफाल्गुनी
  • • हस्त
  • • चित्रा
  • • स्वाती
  • • श्रवण
  • • रेवती

यात्रा के लिए

अनुकूल नक्षत्र:

  • • अश्विनी
  • • मृगशिरा
  • • पुनर्वसु
  • • हस्त
  • • चित्रा
  • • स्वाती
  • • अनुराधा
  • • श्रवण
  • • धनिष्ठा
  • • शतभिषा
  • • रेवती

प्रत्येक नक्षत्र की विशेषताएं

प्रत्येक नक्षत्र की संक्षिप्त विशेषता जो उस नक्षत्र में जन्मे जातकों में दिखती है:

1. अश्विनी

तीव्र, उर्जावान, चिकित्सा प्रतिभा, नई शुरुआत करने वाले। अश्विनी कुमारों जैसी उपचार शक्ति। स्वतंत्र विचारक।

2. भरणी

यम के नक्षत्र — कठोर परिश्रम, नियम-पालन, सृजन और विनाश दोनों की क्षमता। महत्वाकांक्षी और दृढ़निश्चयी।

3. कृत्तिका

अग्नि की तरह तेज और तीव्र। नेतृत्व, आत्मविश्वास और तीव्र बुद्धि। कार्तिकेय के नक्षत्र — युद्ध और विजय।

4. रोहिणी

ब्रह्मा का नक्षत्र — सुंदरता, कला, प्रेम और भौतिक समृद्धि। बहुत आकर्षक व्यक्तित्व। कृष्ण जी का जन्म नक्षत्र।

5. मृगशिरा

सोम का नक्षत्र — जिज्ञासु, खोजी, यात्रा-प्रेमी। नई चीजों की तलाश, संवेदनशील और बुद्धिमान।

6. आर्द्रा

रुद्र का नक्षत्र — परिवर्तन, तूफान और नवीनीकरण। तीव्र मन, विज्ञान में रुचि। बड़े बदलाव इन्हें रास आते हैं।

7. पुनर्वसु

अदिति का नक्षत्र — पुनर्जन्म, उदारता और वापस लौटने की शक्ति। भगवान राम का जन्म नक्षत्र। धार्मिक और दयालु।

8. पुष्य

27 में सर्वश्रेष्ठ — बृहस्पति का नक्षत्र। पोषण, देखभाल, धार्मिकता और सामाजिक सेवा। इस नक्षत्र में शुरू किए कार्य सफल होते हैं।

9. आश्लेषा

नाग देवता का नक्षत्र — रहस्यमय, तीव्र अंतर्ज्ञान, कुंडलिनी शक्ति। तांत्रिक ज्ञान और मनोवैज्ञानिक तीक्ष्णता।

10. मघा

पितृ देवताओं का नक्षत्र — राजसी, परंपरा-प्रेमी, वंश-गर्व। नेतृत्व और प्राधिकार। ऐतिहासिक कार्यों में रुचि।

11. पूर्वाफाल्गुनी

भग देवता का नक्षत्र — विलास, कला, प्रेम और विश्राम। आनंदप्रिय, रचनात्मक। कला-साहित्य में उत्कृष्ट।

12. उत्तराफाल्गुनी

आर्यमन का नक्षत्र — मित्रता, विवाह और सामाजिक बंधन। उदार, विश्वासपात्र और कर्तव्यनिष्ठ।

13. हस्त

सविता का नक्षत्र — हस्त कला, चतुरता, चिकित्सा। हाथों से काम करने में दक्ष। व्यावहारिक बुद्धि और चतुरता।

14. चित्रा

विश्वकर्मा का नक्षत्र — सौंदर्य, वास्तुकला, डिजाइन। आकर्षक व्यक्तित्व, रचनात्मकता और स्वतंत्र विचार।

15. स्वाती

वायु का नक्षत्र — स्वतंत्रता, व्यापार, कूटनीति। लचीला और अनुकूलनशील। व्यापार में बहुत सफल।

16. विशाखा

इंद्र-अग्नि का नक्षत्र — उद्देश्यपूर्ण, दृढ़, परिणाम-केंद्रित। दो भावों में विभाजित — दो गुणों का संगम।

17. अनुराधा

मित्र देवता का नक्षत्र — मित्रता, भक्ति और रहस्यों की तलाश। संगठनात्मक क्षमता और भावनात्मक गहराई।

18. ज्येष्ठा

इंद्र का नक्षत्र — बड़े भाई, नेता, जिम्मेदारी। तीव्र और गहरे अनुभव। परिवार में सबसे बड़े की भूमिका।

19. मूल

निऋति का नक्षत्र — जड़ों तक जाने की प्रवृत्ति, जांच-पड़ताल। आध्यात्मिक शोधकर्ता। गहरे परिवर्तन का नक्षत्र।

20. पूर्वाषाढ़ा

अपः (जल देवी) का नक्षत्र — शुद्धि, उत्साह, अदृश्य शक्ति। अजेय भावना और दृढ़ इच्छाशक्ति।

21. उत्तराषाढ़ा

विश्वदेव का नक्षत्र — अंतिम विजय, न्याय और सत्य। मानवता की सेवा। नेतृत्व और आत्मसम्मान।

22. श्रवण

विष्णु का नक्षत्र — सुनने की शक्ति, ज्ञान और संचार। सीखने और फैलाने की प्रतिभा। श्रवण कुमार जैसी सेवाभावना।

23. धनिष्ठा

अष्टवसु का नक्षत्र — संगीत, धन और प्रसिद्धि। सामाजिक, महत्वाकांक्षी। तेज गति से सफलता।

24. शतभिषा

वरुण का नक्षत्र — एकांत-प्रिय, रहस्यमय, वैद्य (100 चिकित्सकों का नक्षत्र)। वैज्ञानिक सोच और जल-संबंधी ज्ञान।

25. पूर्वाभाद्रपद

अज एकपाद का नक्षत्र — तीव्र आध्यात्मिकता, आंतरिक अग्नि। विरोधाभासी — बाहर शांत, भीतर तूफान।

26. उत्तराभाद्रपद

अहिर्बुध्न्य का नक्षत्र — गहरी बुद्धि, धैर्य और करुणा। संन्यास की ओर झुकाव। जीवन के गहरे रहस्यों में रुचि।

27. रेवती

पूषन का नक्षत्र — अंतिम नक्षत्र, पोषण और सुरक्षा। यात्राओं का संरक्षक। सहानुभूतिशील, कलात्मक और आध्यात्मिक।

नक्षत्र — आपके जीवन का दिव्य मानचित्र

नक्षत्र केवल तारे नहीं हैं — ये आपके जन्म के समय आकाशीय ऊर्जाओं का वह अनूठा संगम है जो आपके व्यक्तित्व, दशा क्रम, स्वास्थ्य और जीवन के बड़े मोड़ों को प्रभावित करता है। अपना जन्म नक्षत्र जानें, उसके स्वामी ग्रह को समझें और अपनी विंशोत्तरी दशा के आधार पर जीवन की योजना बनाएं। GrahaGuru की मुफ्त कुंडली आपका जन्म नक्षत्र, नक्षत्र पाद, दशा काल और नक्षत्र-आधारित विश्लेषण स्वतः प्रदान करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

27 नक्षत्र कौन से हैं?

27 नक्षत्र क्रमशः हैं: अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाती, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती। इनके अलावा अभिजित 28वां नक्षत्र है जिसका उपयोग केवल मुहूर्त में होता है।

मेरा जन्म नक्षत्र कैसे पता करें?

जन्म नक्षत्र जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति से निर्धारित होता है। GrahaGuru पर अपनी जन्मतिथि, समय और स्थान डालकर मुफ्त कुंडली बनाएं — आपका जन्म नक्षत्र, उसके पाद और नाम का पहला अक्षर तुरंत पता चल जाएगा। जन्म नक्षत्र से आपकी विंशोत्तरी दशा का पहला ग्रह और पूरा दशा क्रम निर्धारित होता है।

देव गण, मानव गण और राक्षस गण क्या होता है?

गण नक्षत्रों का स्वभाव-आधारित वर्गीकरण है। देव गण (9 नक्षत्र) — धार्मिक, शांत, सेवाभावी। मानव गण (9 नक्षत्र) — व्यावहारिक, संतुलित, सामाजिक। राक्षस गण (9 नक्षत्र) — स्वतंत्र, तीव्र, महत्वाकांक्षी। विवाह मिलान में समान गण या देव-मानव गण मिलान शुभ माना जाता है। देव-राक्षस मिलान में विशेष ध्यान दिया जाता है।

नक्षत्र और विंशोत्तरी दशा का क्या संबंध है?

विंशोत्तरी दशा (120 वर्षीय चक्र) में जन्म नक्षत्र के स्वामी ग्रह से महादशा शुरू होती है। 9 ग्रह 27 नक्षत्रों के स्वामी हैं — प्रत्येक ग्रह 3 नक्षत्रों का। केतु 7 वर्ष, शुक्र 20 वर्ष, रवि 6 वर्ष, चंद्र 10 वर्ष, मंगल 7 वर्ष, राहु 18 वर्ष, गुरु 16 वर्ष, शनि 19 वर्ष और बुध 17 वर्ष। जन्म के समय चंद्रमा नक्षत्र में कितने अंश था — उसी से दशा शेष (balance) निकलती है।

नक्षत्र पाद से नाम का पहला अक्षर कैसे निकालते हैं?

प्रत्येक नक्षत्र के 4 पाद होते हैं और प्रत्येक पाद से एक विशेष अक्षर निर्धारित होता है। 27 × 4 = 108 पाद = 108 अक्षर। उदाहरण: अश्विनी पाद 1=चु, 2=चे, 3=चो, 4=ला। रोहिणी पाद 1=ओ, 2=वा, 3=वी, 4=वु। पुष्य पाद 1=हु, 2=हे, 3=हो, 4=ड़ा। जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र-पाद में हो, उससे नाम का पहला अक्षर रखने की परंपरा है — यही 'नामकरण संस्कार' में उपयोग होता है।

और पढ़ें

अपना जन्म नक्षत्र और दशा जानें

अपनी जन्म कुंडली से तुरंत पता करें — आपका जन्म नक्षत्र, नक्षत्र पाद, नाम अक्षर, चल रही विंशोत्तरी दशा और नक्षत्र-आधारित विश्लेषण।

मुफ्त कुंडली विश्लेषण करें →
📧

ज्योतिष ज्ञान अपने इनबॉक्स में पाएं

50,000+ ज्योतिष प्रेमियों से जुड़ें! नक्षत्र, ग्रह गोचर और कुंडली ज्ञान सीधे अपने ईमेल पर पाएं।

कोई स्पैम नहीं। कभी भी अनसब्सक्राइब करें।