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त्योहार 2026

महा शिवरात्रि 2026

भगवान शिव की महान रात्रि - पूजा मुहूर्त और विधि

26 दिसंबर 2025 8 मिनट पढ़ने का समय
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महा शिवरात्रि 2026

गुरुवार, 26 फरवरी 2026

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

शिवरात्रि 2026 पूजा मुहूर्त

मुख्य समय

शिवरात्रि तिथि 26 फरवरी 2026 (गुरुवार)
चतुर्दशी तिथि आरंभ 25 फरवरी, शाम
चतुर्दशी तिथि समाप्त 26 फरवरी, शाम
निशिता काल (सर्वोत्तम) रात 12:00 - 12:45*
पारण (व्रत तोड़ना) 27 फरवरी, सूर्योदय के बाद

🕉️ निशिता काल

शिव पूजा के लिए सबसे शुभ समय

निशिता काल में भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे। इस समय अभिषेक करें और बिल्व पत्र अर्पित करें।

शिवरात्रि पूजा के चार प्रहर

प्रथम प्रहर

~शाम 6:00 - 9:00

दूध से अभिषेक। दूध मिश्रित जल से शिवलिंग पर अभिषेक करें।

द्वितीय प्रहर

~रात 9:00 - 12:00

दही से अभिषेक। दही/छाछ से शिवलिंग पर अभिषेक करें।

तृतीय प्रहर (निशिता)

~रात 12:00 - 3:00

घी से अभिषेक। सबसे शुभ प्रहर। घी अर्पित करें।

चतुर्थ प्रहर

~रात 3:00 - 6:00

शहद से अभिषेक। जागरण पूर्ण करने के लिए शहद अर्पित करें।

भगवान शिव को क्या अर्पित करें

🍃

बिल्व पत्र

सबसे पवित्र

🥛

दूध

अभिषेक के लिए

🍯

शहद

मधुरता

💧

गंगाजल

पवित्र जल

🌸

धतूरा

फूल

🔥

धूप

अगरबत्ती

🪔

दीया

तेल का दीपक

🍬

भांग

पारंपरिक

🔱 महा शिवरात्रि का महत्व

महा शिवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह वह रात्रि है जब भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था और समुद्र मंथन से निकला विष पीकर दुनिया को बचाया था।

इस रात्रि को भगवान शिव की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

📿 शिवरात्रि मंत्र

ॐ नमः शिवाय

पंचाक्षर मंत्र - 108 बार जपें

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महा शिवरात्रि 2026 कब है?

महा शिवरात्रि 2026 गुरुवार, 26 फरवरी 2026 को है।

निशिता काल क्या है?

निशिता काल आधी रात का समय है (~रात 12:00 - 12:45) जब भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे। यह पूजा के लिए सबसे शुभ समय है।

क्या पूरी रात जागना जरूरी है?

जागरण (पूरी रात जागना) पारंपरिक है। यदि संभव न हो, तो कम से कम निशिता काल में पूजा अवश्य करें।

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