👶 नामकरण मुहूर्त 2025 👶

Baby Naming Ceremony Dates - Auspicious Naamkaran Muhurat

2025 में नामकरण के शुभ मुहूर्त

नमस्कार! GrahaGuru.in पर आपका स्वागत है। नामकरण हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण संस्कार है जिसमें नवजात शिशु को उसका नाम दिया जाता है। वैदिक परंपरा में नाम केवल पहचान नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व, भाग्य और जीवन पथ को प्रभावित करता है।

शुभ मुहूर्त में और नक्षत्र अनुसार रखा गया नाम बच्चे के लिए शुभ और सफलता प्रदान करने वाला होता है। यहाँ आपको मिलेगी 2025 की सभी शुभ नामकरण तिथियां, नक्षत्र अनुसार नाम रखने की विधि, और संस्कार की पूरी जानकारी।

🎯 नामकरण संस्कार में क्या देखा जाता है?
  • समय: जन्म के 11वें, 12वें, 21वें या 101वें दिन
  • तिथि: शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी
  • वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार
  • नक्षत्र: शुभ नक्षत्र जैसे पुष्य, रोहिणी, हस्त, श्रवण
  • राशि और नक्षत्र: बच्चे की जन्म कुंडली के अनुसार
⚠️ इन दिनों में नामकरण वर्जित:
  • मंगलवार और शनिवार (सामान्यतः)
  • अमावस्या और पूर्णिमा
  • रिक्ता तिथि (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी)
  • सूर्य या चंद्र ग्रहण के दिन
  • श्राद्ध पक्ष
📅 2025 के नामकरण मुहूर्त
महीना शुभ तिथियां विशेष नक्षत्र
फरवरी 2025 13, 17, 21, 27 फरवरी पुष्य, उत्तरा फाल्गुनी
मार्च 2025 3, 7, 12, 19, 26 मार्च रोहिणी, मृगशिरा
अप्रैल 2025 2, 9, 16, 23, 30 अप्रैल हस्त, स्वाति
मई 2025 1, 7, 14, 21, 28 मई अक्षय तृतीया, श्रवण
जून 2025 4, 11, 18, 25 जून पुनर्वसु, अनुराधा
नवंबर 2025 5, 12, 19, 26 नवंबर रोहिणी, रेवती
दिसंबर 2025 3, 10, 17, 24, 31 दिसंबर पुष्य, श्रवण

नोट: ये सामान्य शुभ तिथियां हैं। व्यक्तिगत कुंडली और बच्चे की जन्म तिथि के अनुसार विशेष मुहूर्त निर्धारित करना सर्वोत्तम है।

⭐ नक्षत्र अनुसार नाम रखने की विधि

वैदिक ज्योतिष में प्रत्येक नक्षत्र के अपने विशेष अक्षर होते हैं। बच्चे के जन्म नक्षत्र के अनुसार नाम का पहला अक्षर चुनना शुभ माना जाता है। यहाँ सभी 27 नक्षत्रों और उनके अक्षर दिए गए हैं:

1. अश्विनी नक्षत्र

अक्षर: चू, चे, चो, ला

नाम उदाहरण: चूड़ामणि, चेतन, चोखा, लालित्य, लावण्य

विशेषता: तेज गति, उपचार क्षमता, साहस

2. भरणी नक्षत्र

अक्षर: ली, लू, ले, लो

नाम उदाहरण: लीला, लुब्धक, लेखा, लोकेश

विशेषता: दृढ़ संकल्प, कर्तव्यनिष्ठ, जिम्मेदार

3. कृत्तिका नक्षत्र

अक्षर: अ, ई, उ, ए

नाम उदाहरण: अमित, ईशान, उमा, एकांत

विशेषता: तेज, पवित्रता, नेतृत्व

4. रोहिणी नक्षत्र

अक्षर: ओ, वा, वी, वु

नाम उदाहरण: ओजस्वी, वाणी, वीर, वंदना

विशेषता: सौंदर्य, कला, समृद्धि

5. मृगशिरा नक्षत्र

अक्षर: वे, वो, का, की

नाम उदाहरण: वेदांत, वोह्रा, कार्तिक, कीर्ति

विशेषता: खोज, जिज्ञासा, बुद्धि

6. आर्द्रा नक्षत्र

अक्षर: कु, घ, ङ, छ

नाम उदाहरण: कुमार, घनश्याम, छवि

विशेषता: बुद्धि, परिवर्तन, संवेदनशीलता

7. पुनर्वसु नक्षत्र

अक्षर: के, को, हा, ही

नाम उदाहरण: केशव, कोमल, हर्ष, हिमांशु

विशेषता: नवीनीकरण, सद्भावना, उदारता

8. पुष्य नक्षत्र (सर्वश्रेष्ठ)

अक्षर: हु, हे, हो, ड

नाम उदाहरण: हुमा, हेमंत, होमा, डाल्या

विशेषता: पोषण, धर्म, भाग्य

9. आश्लेषा नक्षत्र

अक्षर: डी, डू, डे, डो

नाम उदाहरण: दीपक, दुर्गा, देव, दोषी

विशेषता: रहस्य, गहराई, बुद्धि

10. मघा नक्षत्र

अक्षर: मा, मी, मू, मे

नाम उदाहरण: माधव, मीरा, मुकुल, मेघना

विशेषता: पूर्वज, शक्ति, सम्मान

11. पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र

अक्षर: मो, टा, टी, टू

नाम उदाहरण: मोहन, तारा, तीर्थ, तुषार

विशेषता: आराम, रचनात्मकता, प्रेम

12. उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र

अक्षर: टे, टो, पा, पी

नाम उदाहरण: तेजस, तोषी, पार्थ, पीयूष

विशेषता: उदारता, समृद्धि, विवाह

13. हस्त नक्षत्र

अक्षर: पू, ष, ण, ठ

नाम उदाहरण: पूजा, षटक, णव, ठाकुर

विशेषता: कौशल, हस्तकला, चतुराई

14. चित्रा नक्षत्र

अक्षर: पे, पो, रा, री

नाम उदाहरण: पेयुष, पोषण, राज, रिया

विशेषता: सौंदर्य, डिजाइन, चमक

15. स्वाति नक्षत्र

अक्षर: रू, रे, रो, ता

नाम उदाहरण: रूपा, रेशम, रोहन, तान्या

विशेषता: स्वतंत्रता, हवा, लचीलापन

16. विशाखा नक्षत्र

अक्षर: ती, तू, ते, तो

नाम उदाहरण: तीर्थ, तुषार, तेजस, तोषम

विशेषता: लक्ष्य, निर्धारण, सफलता

17. अनुराधा नक्षत्र

अक्षर: ना, नी, नू, ने

नाम उदाहरण: नारायण, नीलम, नूपुर, नेहा

विशेषता: मित्रता, भक्ति, सफलता

18. ज्येष्ठा नक्षत्र

अक्षर: नो, या, यी, यू

नाम उदाहरण: नोमन, यश, यति, युवराज

विशेषता: ज्येष्ठता, शक्ति, रक्षा

19. मूल नक्षत्र

अक्षर: ये, यो, भा, भी

नाम उदाहरण: येशा, योगेश, भास्कर, भीम

विशेषता: मूल, गहराई, खोज

20. पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र

अक्षर: भू, ध, फ, ढ

नाम उदाहरण: भूमि, धर्म, फाल्गुन, ढाल

विशेषता: विजय, प्रारंभिक सफलता

21. उत्तराषाढ़ा नक्षत्र

अक्षर: भे, भो, जा, जी

नाम उदाहरण: भेरव, भोगी, जयंत, जितेश

विशेषता: अंतिम विजय, दृढ़ता

22. श्रवण नक्षत्र

अक्षर: जू, जे, जो, घा

नाम उदाहरण: जुही, जेया, जोत, घनश्याम

विशेषता: श्रवण, ज्ञान, सीखना

23. धनिष्ठा नक्षत्र

अक्षर: गा, गी, गु, गे

नाम उदाहरण: गायत्री, गीता, गुरु, गेश

विशेषता: धन, संगीत, प्रसिद्धि

24. शतभिषा नक्षत्र

अक्षर: गो, सा, सी, सू

नाम उदाहरण: गोपाल, सारा, सीमा, सुरेश

विशेषता: उपचार, रहस्य, एकांत

25. पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र

अक्षर: से, सो, दा, दी

नाम उदाहरण: सेवक, सोम, दामोदर, दीप

विशेषता: तीव्रता, परिवर्तन, आध्यात्मिकता

26. उत्तराभाद्रपद नक्षत्र

अक्षर: दू, थ, झ, ञ

नाम उदाहरण: दुर्गा, थानिया, झिलमिल

विशेषता: गहराई, कुंडलिनी, मोक्ष

27. रेवती नक्षत्र

अक्षर: दे, दो, चा, ची

नाम उदाहरण: देव, दोषी, चारु, चिन्मय

विशेषता: पोषण, यात्रा, पूर्णता

🙏 नामकरण संस्कार विधि

1. नामकरण का सही समय

2. पूजा सामग्री

3. संस्कार की विधि

  1. स्वच्छता: घर और बच्चे को स्वच्छ करें
  2. मंडप सजाना: पूजा स्थल को सजाएं
  3. गणेश पूजन: भगवान गणेश की पूजा से शुरुआत करें
  4. कुलदेवता पूजन: कुल देवी-देवता का आह्वान करें
  5. नाम घोषणा: पिता या पुरोहित बच्चे के कान में नाम बोलें (3 बार)
  6. शहद चटाना: सोने की अंगूठी में शहद लेकर बच्चे को चटाएं
  7. नाम लिखना: चावल या हल्दी से नाम लिखें
  8. आशीर्वाद: सभी बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें
  9. आरती: भगवान की आरती करें
  10. प्रसाद वितरण: सभी को प्रसाद और मिठाई बांटें

4. नामकरण मंत्र

गणेश मंत्र:
"ॐ गं गणपतये नमः"

नामकरण मंत्र:
"ॐ देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः॥"

विष्णु मंत्र:
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"

मंगल मंत्र:
"सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥"

5. नाम के प्रकार

💡 नाम चुनते समय ध्यान दें

✅ शुभ नाम की विशेषताएं

❌ नाम में बचें

🌟 लोकप्रिय हिंदू नाम

लड़कों के नाम:

लड़कियों के नाम:

🗺️ क्षेत्रीय परंपराएं

उत्तर भारत

दक्षिण भारत

पश्चिम भारत

पूर्व भारत

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❓ नामकरण से जुड़े प्रश्न

Q1. बच्चे का नामकरण कब करना चाहिए?
परंपरागत रूप से नामकरण जन्म के 11वें या 12वें दिन किया जाता है। यह समय सूतक (प्रसव के बाद की अपवित्रता अवधि) समाप्त होने के बाद आता है। हालांकि, आजकल 21वें दिन या एक महीने बाद भी नामकरण संस्कार किया जा सकता है। मुख्य बात यह है कि शुभ मुहूर्त में और जन्म के एक वर्ष के भीतर नामकरण कर लें।
Q2. नक्षत्र अनुसार नाम क्यों रखना चाहिए?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जन्म नक्षत्र व्यक्ति के व्यक्तित्व और भाग्य को प्रभावित करता है। प्रत्येक नक्षत्र के विशेष अक्षर होते हैं जो उस नक्षत्र की ऊर्जा से जुड़े हैं। नक्षत्र अनुसार नाम रखने से बच्चे को ग्रहों का अनुकूल प्रभाव मिलता है और जीवन में सफलता प्राप्त होती है। यह परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है।
Q3. क्या दो नाम रख सकते हैं?
हाँ, आप बच्चे के दो या तीन नाम रख सकते हैं: 1) नक्षत्र नाम - जो धार्मिक और ज्योतिषीय रूप से महत्वपूर्ण है, 2) व्यावहारिक नाम - जो दैनिक जीवन में उपयोग होता है, 3) पूरा नाम - जो दस्तावेजों में लिखा जाता है। यह पूर्णतः स्वीकार्य है और कई परिवारों में प्रचलित है।
Q4. क्या जन्म प्रमाण पत्र पर नक्षत्र नाम लिखना जरूरी है?
नहीं, जन्म प्रमाण पत्र पर आप कोई भी नाम लिख सकते हैं। यह आपकी व्यक्तिगत पसंद है। कुछ लोग नक्षत्र नाम को धार्मिक नाम के रूप में रखते हैं और व्यावहारिक नाम को दस्तावेजों में लिखते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि नक्षत्र नाम का ज्योतिषीय महत्व हो और वह बच्चे के लिए शुभ हो।
Q5. क्या नाम बदल सकते हैं?
हाँ, नाम बदला जा सकता है, लेकिन यह अधिमानतः बचपन में ही करना चाहिए। यदि बच्चे का नाम ज्योतिषीय रूप से अशुभ है या नकारात्मक प्रभाव दे रहा है, तो उसे बदलना उचित है। नाम बदलने के लिए: 1) नई कुंडली बनवाएं, 2) शुभ मुहूर्त देखें, 3) नया नामकरण संस्कार करें, 4) आवश्यक दस्तावेज बदलें।
Q6. क्या नामकरण में पंडित जरूरी है?
पंडित जरूरी नहीं है, लेकिन सहायक है। यदि आप वैदिक विधि से नामकरण करना चाहते हैं, तो पंडित मंत्रों और विधियों में मार्गदर्शन कर सकते हैं। हालांकि, आप स्वयं भी सरल पूजा कर सकते हैं। महत्वपूर्ण है: 1) शुभ मुहूर्त, 2) नक्षत्र अनुसार नाम, 3) गणेश पूजन, 4) बड़ों का आशीर्वाद।
Q7. नाम में कितने अक्षर होने चाहिए?
ज्योतिष के अनुसार, नाम में विषम संख्या में अक्षर (1, 3, 5, 7, 9, 11) शुभ माने जाते हैं। सबसे आम और शुभ हैं: 3, 5, या 7 अक्षर वाले नाम। बहुत लंबे नाम (11 से अधिक अक्षर) व्यावहारिक कठिनाई पैदा कर सकते हैं। नाम आसानी से उच्चारण और याद होने वाला होना चाहिए।
Q8. क्या अंग्रेजी नाम रख सकते हैं?
हाँ, आप अंग्रेजी या किसी भी भाषा का नाम रख सकते हैं। हालांकि, यदि आप वैदिक परंपरा का पालन करना चाहते हैं, तो संस्कृत या हिंदी नाम अधिक उपयुक्त हैं। आधुनिक समय में कई परिवार एक नाम संस्कृत में (धार्मिक उपयोग के लिए) और एक नाम अंग्रेजी में (व्यावहारिक उपयोग के लिए) रखते हैं। महत्वपूर्ण है कि नाम का अर्थ सकारात्मक हो।
Q9. जुड़वा बच्चों के नाम कैसे रखें?
जुड़वा बच्चों के नाम रखते समय: 1) दोनों के जन्म नक्षत्र के अनुसार अलग-अलग नाम रखें (यदि अलग नक्षत्र हैं), 2) यदि एक ही नक्षत्र है, तो उस नक्षत्र के अलग-अलग अक्षरों से नाम चुनें, 3) मिलते-जुलते नाम रख सकते हैं (जैसे राम-लक्ष्मण, सीता-गीता), 4) दोनों बच्चों का अलग-अलग नामकरण संस्कार करें।
Q10. क्या नामकरण में खर्च बहुत आता है?
नामकरण का खर्च आपकी पसंद पर निर्भर करता है। सरल घरेलू पूजा 500-2000 रुपये में हो सकती है। पंडित के साथ पूजा 2000-5000 रुपये में। बड़े समारोह में भोजन, मिठाई आदि के साथ 10,000-50,000 रुपये तक खर्च हो सकता है। याद रखें, संस्कार का धार्मिक महत्व है, न कि भव्यता का। सरल पूजा भी उतनी ही शुभ है।

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