Aaj Ka Panchang, Tuesday, 20 October 2026. नई दिल्ली, सूर्योदय के समय।
मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सूर्योदय (06:25) के समय शुक्ल नवमी तिथि है, जो 12:50 तक रहेगी; उसके बाद शुक्ल दशमी। नक्षत्र श्रवण है (18:01 तक, फिर धनिष्ठा), योग शूल और करण कौलव। हिंदू माह (अमांत) आश्विन है। आज दशहरा, दुर्गा पूजा है। राहु काल 14:56 - 16:21 है।
| तिथि | शुक्ल नवमी (12:50 तक), फिर शुक्ल दशमी |
|---|---|
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| नक्षत्र | श्रवण, चरण 3 (18:01 तक), फिर धनिष्ठा |
| योग | शूल |
| करण | कौलव |
| हिंदू माह (अमांत) | आश्विन |
| वार | मंगलवार, स्वामी मंगल |
| सूर्योदय / सूर्यास्त | 06:25 / 17:47 |
| त्योहार | दशहरा, दुर्गा पूजा |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:43 - 12:28 |
|---|---|
| राहु काल | 14:56 - 16:21 |
| यमगंड | 09:15 - 10:41 |
| गुलिक काल | 12:06 - 13:31 |
आज के सभी 16 चौघड़िया (दिल्ली) · आज की तिथि और आने वाली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या
आज, मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को सूर्योदय पर शुक्ल नवमी तिथि है, जो 12:50 तक रहेगी। उसके बाद शुक्ल दशमी शुरू होगी।
आज सूर्योदय पर श्रवण नक्षत्र है (चरण 3), जो 18:01 तक रहेगा; फिर धनिष्ठा।
आज नई दिल्ली में राहु काल 14:56 - 16:21 है। यमगंड 09:15 - 10:41 और गुलिक काल 12:06 - 13:31 है।
तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इन्हीं से दिन का शुभ-अशुभ, व्रत और मुहूर्त तय होते हैं।
पंचांग: आज की तिथि · Panchang (English) · अभिजीत मुहूर्त · अमावस्या · पूर्णिमा
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20 अक्टूबर 2026, रात 12:05 बजे (IST) नया। तिथि, नक्षत्र, योग और करण नई दिल्ली के सूर्योदय पर सूर्य-चंद्र की स्थिति (लाहिड़ी अयनांश) से निकाले गए हैं; समाप्ति का समय छपे पंचांग से कुछ मिनट अलग हो सकता है। सभी समय IST में।
पंचांग (Panchang) संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है "पांच अंग"। यह हिंदू वैदिक कैलेंडर सिस्टम है जो पांच प्रमुख खगोलीय तत्वों पर आधारित है। पंचांग का उपयोग शुभ मुहूर्त, त्योहार, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान निर्धारित करने के लिए किया जाता है।
Panchang (Hindu Calendar) is based on five elements: Tithi (lunar day), Var (weekday), Nakshatra (lunar mansion/constellation), Yoga (luni-solar day), and Karana (half of Tithi). It's an essential tool in Vedic astrology for determining auspicious times (Muhurat) for important activities, religious ceremonies, and understanding daily cosmic influences.
प्राचीन काल से ही भारतीय समाज में पंचांग का महत्वपूर्ण स्थान है। यह केवल तिथियां बताने का साधन नहीं, बल्कि जीवन को ब्रह्मांडीय लय के साथ संरेखित करने का विज्ञान है।
परिभाषा: चंद्र दिवस। सूर्य और चंद्रमा के बीच 12 डिग्री का कोणीय अंतर एक तिथि बनाता है। एक महीने में 30 तिथियां होती हैं - 15 शुक्ल पक्ष (वृद्धि) और 15 कृष्ण पक्ष (क्षय)।
30 तिथियां:
शुक्ल पक्ष: प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा
कृष्ण पक्ष: प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या
महत्व: विभिन्न तिथियां विभिन्न कार्यों के लिए शुभ/अशुभ होती हैं। एकादशी उपवास के लिए, पूर्णिमा पूजा के लिए, अमावस्या पितृ तर्पण के लिए विशेष महत्वपूर्ण है।
परिभाषा: सप्ताह के सात दिन, प्रत्येक एक ग्रह द्वारा शासित।
परिभाषा: चंद्र मंडल को 27 भागों में बांटा गया है, प्रत्येक भाग एक नक्षत्र है। चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र में रहता है।
27 नक्षत्र:
उपयोग: जन्म नक्षत्र व्यक्तित्व निर्धारित करता है। नक्षत्र के आधार पर नामकरण, विवाह मुहूर्त और गुण मिलान होता है।
परिभाषा: सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त गति से बनने वाला विशेष संयोजन। कुल 27 योग होते हैं।
शुभ योग: सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इंद्र, वैधृति (विशेष परिस्थितियों में), ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यतीपात (विशेष), वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, अमृत
अशुभ योग: व्यतीपात, वैधृति, गंड - इन योगों में महत्वपूर्ण कार्य टालने चाहिए।
परिभाषा: तिथि का आधा भाग। एक तिथि में दो करण होते हैं। कुल 11 करण हैं - 4 स्थिर और 7 चर।
चर करण (7): बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि (भद्रा) - ये बार-बार दोहराते हैं
स्थिर करण (4): शकुनि, चतुष्पाद, नाग, किंस्तुघ्न - ये महीने में एक बार आते हैं
विशेष: विष्टि (भद्रा) करण अशुभ माना जाता है। इस समय नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।
प्रतिदिन का अशुभ समय जब कोई नया शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। प्रत्येक दिन के लिए अलग समय:
रविवार: 16:30-18:00
सोमवार: 07:30-09:00
मंगलवार: 15:00-16:30
बुधवार: 12:00-13:30
गुरुवार: 13:30-15:00
शुक्रवार: 10:30-12:00
शनिवार: 09:00-10:30
नोट: समय सूर्योदय-सूर्यास्त के आधार पर बदलता है।
राहु काल के समान अशुभ समय। शनि के पुत्र गुलिक द्वारा शासित। इस समय भी शुभ कार्य टालें।
यम का समय। तीसरा अशुभ काल। दीर्घ यात्रा और महत्वपूर्ण निर्णय इस समय से बचें।
दोपहर का शुभ समय (लगभग 12:00-13:00)। यह स्वतः शुभ होता है और किसी भी दिन उपलब्ध रहता है। छोटे शुभ कार्यों के लिए आदर्श।
चैत्र
मार्च-अप्रैल | वसंत
वैशाख
अप्रैल-मई | वसंत
ज्येष्ठ
मई-जून | ग्रीष्म
आषाढ़
जून-जुलाई | ग्रीष्म
श्रावण
जुलाई-अगस्त | वर्षा
भाद्रपद
अगस्त-सितंबर | वर्षा
आश्विन
सितंबर-अक्टूबर | शरद
कार्तिक
अक्टूबर-नवंबर | शरद
मार्गशीर्ष
नवंबर-दिसंबर | हेमंत
पौष
दिसंबर-जनवरी | हेमंत
माघ
जनवरी-फरवरी | शिशिर
फाल्गुन
फरवरी-मार्च | शिशिर
विशेष शुभ योग जब तिथि, वार और नक्षत्र का अद्भुत संयोग होता है। इस समय सभी कार्य सफल होते हैं।
अमृत के समान शुभ योग। दुर्लभ संयोजन। इस समय किया गया कार्य अमर फल देता है।
दोगुना शुभ फल देने वाला योग। धार्मिक कार्य, दान के लिए उत्तम।
तिगुना शुभ फल। अत्यंत दुर्लभ। जीवन में कुछ ही बार आता है।
पांच विशेष नक्षत्रों (धनिष्ठा के अंतिम चरण से रेवती तक) का समय। इसमें दक्षिण दिशा यात्रा, घर निर्माण, बिस्तर खरीदना वर्जित है।